कल्पना कीजिए एक तरफ ट्रंप और मोदी की दोस्ती की तस्वीरें वायरल हो रही हैं, और दूसरी तरफ व्हाइट हाउस अपनी ट्रेड डील की फैक्टशीट में चुपचाप बदलाव कर देता है। थोड़ा गुस्सा, थोड़ा राहत—ऐसा ही महसूस होता है जब आपके देश की नौकरियां, किसान और रसोई की दाल अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर निर्भर हों।
फरवरी 2026 में सामने आए US revisions to the trade deal factsheet ने भारत में हलचल मचा दी। ये सिर्फ शब्दों का बदलाव नहीं था, बल्कि इसके पीछे बड़े आर्थिक और राजनीतिक मायने छिपे थे। आइए समझते हैं कि क्या बदला और इससे भारत पर क्या असर पड़ा।
पृष्ठभूमि: “ऐतिहासिक” डील और अचानक आया ट्विस्ट
फरवरी 2026 की शुरुआत में अमेरिका और भारत ने एक “historic” अंतरिम ट्रेड डील का ऐलान किया। व्हाइट हाउस की ओर से जारी फैक्टशीट में बड़े दावे किए गए थे—भारत बड़े पैमाने पर अमेरिकी खरीद करेगा, कुछ कृषि उत्पादों पर टैरिफ घटाएगा, डिजिटल सर्विस टैक्स हटाएगा वगैरह।
लेकिन सिर्फ 24 से 48 घंटे के भीतर फैक्टशीट में बदलाव कर दिए गए। यही थे US revisions to the trade deal factsheet। इन संशोधनों ने साफ संकेत दिया कि भारत के कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को बचाने की कोशिश की गई है।
डील टूटी नहीं, लेकिन भाषा बदल गई। और कूटनीति में शब्दों का बहुत महत्व होता है—एक शब्द से किसानों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।
मुख्य बदलाव: क्या-क्या बदला?
1. दालों (Pulses) का जिक्र हटाया गया
पहली फैक्टशीट में कहा गया था कि भारत “certain pulses” जैसे मसूर और चना पर टैरिफ घटाएगा या खत्म करेगा। संशोधित संस्करण में दालों का जिक्र पूरी तरह हटा दिया गया।
अब सूची में सिर्फ dried distillers’ grains, red sorghum, tree nuts, fruits, soybean oil, wine & spirits जैसे उत्पाद शामिल हैं।
भारत में दाल रोजमर्रा का हिस्सा है। अगर अमेरिकी दाल सस्ते दाम पर आती, तो भारतीय किसानों की आय पर असर पड़ सकता था। इस बदलाव से किसानों को बड़ी राहत मिली।
2. $500 बिलियन खरीद की भाषा बदली
पहले लिखा था कि भारत “committed” है 500 बिलियन डॉलर से अधिक अमेरिकी ऊर्जा, आईसीटी और कोयला खरीदने के लिए। संशोधित दस्तावेज में इसे “intends to” कर दिया गया।
यानी “प्रतिबद्ध” से “इरादा रखता है” तक का बदलाव। इसका मतलब यह है कि अब यह बाध्यकारी नहीं है, बल्कि एक इरादा है। इससे भारत को आर्थिक लचीलापन मिला।
3. डिजिटल सर्विस टैक्स का मुद्दा हटाया गया
पहले दावा किया गया था कि भारत डिजिटल सर्विस टैक्स हटाएगा। संशोधित फैक्टशीट में यह बात हटा दी गई और सिर्फ डिजिटल ट्रेड नियमों पर बातचीत की बात कही गई।
इससे भारत की डिजिटल संप्रभुता बनी रहती है और स्टार्टअप व टेक सेक्टर पर तत्काल दबाव नहीं पड़ता।
भारत पर इसका क्या असर?
अब सबसे अहम सवाल—इन बदलावों से भारत को क्या मिला?
सकारात्मक पहलू:
कृषि क्षेत्र, खासकर दालों के किसान सुरक्षित रहे
500 बिलियन डॉलर की खरीद बाध्यकारी नहीं रही
डिजिटल टैक्स पर भारत का नियंत्रण बना रहा
टैरिफ में कटौती अब गैर-संवेदनशील उत्पादों तक सीमित है
अमेरिकी पारस्परिक टैरिफ 25% से घटकर 18% हुआ, जिससे भारतीय निर्यातकों को कुछ राहत मिली
सावधानी की बात:
अमेरिका भविष्य की बातचीत में सख्त रुख अपना सकता है
18% टैरिफ अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है
कुल मिलाकर, ये संशोधन भारत के पक्ष में झुके हुए दिखाई देते हैं और दिखाते हैं कि बातचीत में भारत ने मजबूत रुख अपनाया।
तुलना: मूल बनाम संशोधित फैक्टशीट
| पहलू | मूल फैक्टशीट (9 फरवरी 2026) | संशोधित फैक्टशीट (10-11 फरवरी 2026) | भारत पर असर |
|---|---|---|---|
| दालों पर टैरिफ | “Certain pulses” शामिल | पूरी तरह हटाया गया | किसानों को राहत |
| $500 बिलियन खरीद | “Committed to” | “Intends to” | कम बाध्यता, अधिक लचीलापन |
| डिजिटल सर्विस टैक्स | भारत हटाएगा | हटाया गया, सिर्फ बातचीत | डिजिटल संप्रभुता सुरक्षित |
| अमेरिकी टैरिफ | 25% | 18% | निर्यातकों को आंशिक राहत |
| कुल भाषा | अमेरिकी लाभ प्रमुख | संतुलित और नरम | भारत की मजबूत बातचीत |
निष्कर्ष
US revisions to the trade deal factsheet यह याद दिलाते हैं कि वैश्विक व्यापार सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय हितों और भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है।
भारत ने अपने किसानों, डिजिटल सेक्टर और आर्थिक स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी। यह समझौता अभी अंतरिम है और पूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत जारी है। लेकिन इन संशोधनों ने संकेत दिया है कि संतुलित साझेदारी संभव है।
FAQs
Q1: US revisions to the trade deal factsheet क्या है?
फरवरी 2026 में व्हाइट हाउस द्वारा जारी मूल फैक्टशीट में किए गए बदलाव, जिनमें दालों, 500 बिलियन डॉलर खरीद और डिजिटल टैक्स से जुड़े दावे बदले गए।
Q2: दालों को सूची से क्यों हटाया गया?
क्योंकि दाल भारत के लिए संवेदनशील कृषि क्षेत्र है और किसानों के हित प्रभावित हो सकते थे।
Q3: क्या भारत को फायदा हुआ?
ज्यादातर मामलों में हां। कृषि और डिजिटल क्षेत्र सुरक्षित रहे और खरीद बाध्यता कम हुई।
Q4: क्या यह अंतिम समझौता है?
नहीं, यह एक अंतरिम ढांचा है। पूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत जारी है।
Disclaimer
यह लेख फरवरी 11, 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और रिपोर्ट्स पर आधारित है। ट्रेड समझौते समय के साथ बदल सकते हैं। सटीक जानकारी के लिए सरकारी स्रोतों की पुष्टि करें। यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है।

