आज सुबह जैसे ही यह खबर सामने आई कि मुकुल रॉय अब हमारे बीच नहीं रहे, पूरे पश्चिम बंगाल की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई। 23 फरवरी 2026 को तड़के करीब 1:30 बजे कोलकाता के Apollo Hospital में कार्डियक अरेस्ट के कारण उनका निधन हो गया। वह 71 वर्ष के थे।
लंबी बीमारी और कोमा में रहने के बाद आए इस massive cardiac arrest ने एक ऐसे नेता को हमसे छीन लिया, जिन्हें बंगाल की राजनीति का ‘चाणक्य’ कहा जाता था। उनके बेटे Subhranshu Roy ने उनके निधन की पुष्टि की।
यह सिर्फ एक नेता का जाना नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति के एक अहम अध्याय का अंत है।
शुरुआती जीवन और राजनीति में कदम
मुकुल रॉय का जन्म 17 अप्रैल 1954 को पश्चिम बंगाल के कांचरापाड़ा में हुआ था। उन्होंने 1980 के दशक में यूथ कांग्रेस से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की।
साल 1998 में जब Mamata Banerjee ने All India Trinamool Congress (टीएमसी) की स्थापना की, तब मुकुल रॉय उनके साथ शुरुआती दौर से जुड़े रहे। वे पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और पहले राष्ट्रीय महासचिव बने।
2011 में 34 साल पुरानी वाम मोर्चा सरकार को सत्ता से हटाने में उनकी रणनीतिक भूमिका अहम मानी जाती है। उस दौर में उन्हें टीएमसी का ‘नंबर 2’ नेता भी कहा जाता था।
केंद्र की राजनीति में भूमिका
जब यूपीए-2 सरकार में टीएमसी सहयोगी थी, तब मुकुल रॉय को केंद्र में मंत्री पद मिला।
2009 से 2011 तक वे शिपिंग राज्यमंत्री रहे।
मार्च 2012 से सितंबर 2012 तक वे भारत के 32वें रेल मंत्री बने।
रेल किराया बढ़ोतरी विवाद के बाद उन्होंने यह जिम्मेदारी संभाली थी। हालांकि उनका कार्यकाल लंबा नहीं रहा, लेकिन उस दौरान उन्होंने रेलवे में सुधार की कोशिशें कीं।
टीएमसी से बीजेपी तक का सफर
साल 2015 के बाद टीएमसी के साथ उनके मतभेद सामने आए। 2017 में उन्होंने पार्टी और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर Bharatiya Janata Party (बीजेपी) जॉइन कर ली।
बीजेपी ने उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया। 2019 लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में बीजेपी की 18 सीटों की जीत के पीछे उनकी रणनीति को अहम माना गया।
2021 के विधानसभा चुनाव में वे कृष्णानगर उत्तर सीट से बीजेपी के टिकट पर विधायक बने। लेकिन चुनाव के बाद जून 2021 में उन्होंने फिर से टीएमसी का दामन थाम लिया।
बाद में दल-बदल कानून के तहत कलकत्ता हाईकोर्ट ने नवंबर 2025 में उनकी विधायक सदस्यता रद्द कर दी थी, हालांकि सुप्रीम कोर्ट से उन्हें राहत मिली थी।
निजी जीवन और स्वास्थ्य संघर्ष
मुकुल रॉय के बेटे सुभ्रांशु रॉय भी राजनीति में सक्रिय हैं। उनकी पत्नी का कुछ वर्ष पहले कार्डियक अरेस्ट से निधन हो चुका था।
पिछले कुछ वर्षों से मुकुल रॉय गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। उन्हें डिमेंशिया सहित कई स्वास्थ्य समस्याएं थीं। कई बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। धीरे-धीरे उनकी सेहत बिगड़ती गई और अंततः वे कोमा में चले गए।
23 फरवरी 2026 को आए कार्डियक अरेस्ट ने उनके जीवन का अंत कर दिया।
राजनीतिक जगत की प्रतिक्रियाएं
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए “ओम शांति” लिखा।
ममता बनर्जी और टीएमसी नेताओं ने भी गहरा दुख जताया। सोशल मीडिया पर #MukulRoy, #BengalPolitics जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।
लोग उन्हें एक ऐसे रणनीतिकार के रूप में याद कर रहे हैं, जिन्होंने अलग-अलग राजनीतिक चरणों में अपनी अहम भूमिका निभाई।
मुकुल रॉय के जीवन की प्रमुख उपलब्धियां
| वर्ष | उपलब्धि | भूमिका/पार्टी |
|---|---|---|
| 1980s | यूथ कांग्रेस से शुरुआत | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस |
| 1998 | टीएमसी के संस्थापक सदस्य | तृणमूल कांग्रेस |
| 2006–2017 | दो कार्यकाल राज्यसभा सांसद | टीएमसी |
| 2009–2011 | शिपिंग राज्यमंत्री | यूपीए सरकार |
| 2012 | 32वें रेल मंत्री | यूपीए-टीएमसी |
| 2017 | टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल | बीजेपी |
| 2020 | राष्ट्रीय उपाध्यक्ष | बीजेपी |
| 2021 | कृष्णानगर उत्तर से विधायक | बीजेपी, बाद में टीएमसी |
| 2026 | 23 फरवरी को निधन | — |
एक दौर का अंत
मुकुल रॉय का जाना सिर्फ एक व्यक्ति का निधन नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति के एक दौर का समापन है। उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों में अपनी रणनीतिक क्षमता से पहचान बनाई।
उनकी राजनीतिक यात्रा में उतार-चढ़ाव रहे, लेकिन उनकी संगठनात्मक पकड़ और रणनीतिक सोच को हमेशा याद किया जाएगा।
ईश्वर से प्रार्थना है कि उनकी आत्मा को शांति मिले और उनके परिवार को इस कठिन समय में संबल प्रदान करे।
ओम शांति।
FAQs
प्रश्न 1: मुकुल रॉय का निधन कब और कैसे हुआ?
उत्तर: 23 फरवरी 2026 को तड़के 1:30 बजे कोलकाता के अपोलो अस्पताल में कार्डियक अरेस्ट से।
प्रश्न 2: उनकी उम्र कितनी थी?
उत्तर: 71 वर्ष (जन्म 17 अप्रैल 1954)।
प्रश्न 3: वह आखिरी समय में किस पार्टी में थे?
उत्तर: तृणमूल कांग्रेस में।
प्रश्न 4: उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक भूमिका क्या रही?
उत्तर: 2011 में टीएमसी की जीत में रणनीतिक भूमिका और 2019 में बंगाल में बीजेपी के विस्तार में योगदान।
Disclaimer
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