घर खरीदना किसी भी भारतीय के लिए जिंदगी का सबसे बड़ा सपना होता है। लेकिन जब यह सपना सच होने के करीब पहुंचता है, तो कई बार टैक्स के नियम रास्ते में आ खड़े होते हैं। प्रॉपर्टी खरीदते समय TDS का नियम कई सालों से लागू है, फिर भी हजारों खरीदार अनजाने में इसकी अनदेखी कर देते हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसी याचिका खारिज कर दी है, जिससे लाखों संपत्ति खरीदारों को राहत मिलने की उम्मीद थी। खासकर पहली बार घर खरीदने वाले मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह फैसला बड़ा झटका माना जा रहा है। आइए समझते हैं पूरा मामला।
TDS on Property Purchase क्या है? जानें मूल नियम
आयकर अधिनियम की धारा 194IA के तहत, यदि कोई व्यक्ति ₹50 लाख या उससे अधिक की अचल संपत्ति (जमीन, घर, फ्लैट आदि – कृषि भूमि को छोड़कर) खरीदता है, तो खरीदार को विक्रेता को भुगतान करते समय 1% TDS काटना अनिवार्य है।
यह TDS खरीदार को Form 26QB के माध्यम से जमा करना होता है और बाद में विक्रेता को TDS सर्टिफिकेट देना पड़ता है।
सुनने में यह प्रक्रिया आसान लगती है, लेकिन हकीकत यह है कि कई खरीदार इस नियम से अनजान रहते हैं और बाद में डिफॉल्टर बन जाते हैं।
याचिका में क्या मांग की गई थी?
अरुण सिंह मामले में दायर एक जनहित याचिका (PIL) में यह कहा गया था कि:
खरीदारों को TDS देनदारी के बारे में सूचित करने के लिए कोई संस्थागत व्यवस्था नहीं है।
संपत्ति पंजीकरण के समय रजिस्ट्रार कार्यालय में TDS अनुपालन की जांच नहीं होती।
पहली बार घर खरीदने वाले लोग अनजाने में नियम तोड़ देते हैं।
बाद में उन पर ब्याज और जुर्माना लगाया जाता है, जो अनुचित है।
याचिका में मांग की गई थी कि कुछ सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं, जैसे रजिस्ट्रेशन से पहले TDS सत्यापन अनिवार्य किया जाए या ऑटोमैटिक अलर्ट सिस्टम बनाया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की?
11 फरवरी 2026 को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की।
अदालत ने संक्षिप्त आदेश में याचिका खारिज कर दी। कोर्ट का कहना था कि कानून में TDS की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से खरीदार पर तय है। अतिरिक्त सुरक्षा उपायों के लिए अदालत निर्देश नहीं दे सकती।
साफ शब्दों में, अदालत ने कहा कि कानून का पालन करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। कानून की जानकारी न होना कोई बहाना नहीं हो सकता।
आम खरीदारों पर क्या होगा असर?
₹50 लाख या उससे अधिक की संपत्ति पर 1% TDS काटना अब भी अनिवार्य रहेगा।
TDS न काटने या जमा न करने पर 1% प्रति माह ब्याज और भारी जुर्माना लग सकता है।
पहली बार घर खरीदने वाले लोग, जो टैक्स विशेषज्ञ की मदद नहीं लेते, अधिक जोखिम में रहेंगे।
अब प्रॉपर्टी डील करते समय ज्यादा सतर्क रहना जरूरी होगा।
कल्पना कीजिए, आपने अपनी सालों की बचत से फ्लैट खरीदा और खुशी में TDS काटना भूल गए। एक साल बाद अगर 50 हजार रुपये से ज्यादा का नोटिस आ जाए, तो झटका लगना स्वाभाविक है।
TDS on Property Purchase: लोग क्यों हैं कंफ्यूज?
हाल के समय में “TDS on property purchase”, “Section 194IA TDS”, “property buyers TDS liability” और “Supreme Court TDS rejection” जैसे शब्द इंटरनेट पर खूब सर्च किए जा रहे हैं।
बजट 2026 में NRI संपत्ति बिक्री के मामलों में PAN आधारित चालान जैसी कुछ राहत दी गई है, लेकिन सामान्य निवासी खरीदारों के लिए TDS का नियम पहले जैसा ही है।
प्रॉपर्टी खरीदारों के लिए जरूरी सावधानियां
विक्रेता से PAN जरूर लें।
आयकर पोर्टल पर जाकर Form 26QB ऑनलाइन भरें।
भुगतान करते समय 1% TDS काटें।
TDS सर्टिफिकेट जारी करके विक्रेता को दें।
बेहतर होगा कि किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स सलाहकार से परामर्श लें।
थोड़ी सी सतर्कता भविष्य में बड़ी परेशानी से बचा सकती है।
TDS दर और नियम एक नजर में
| संपत्ति मूल्य | TDS दर | कौन काटेगा | जमा करने का फॉर्म | डिफॉल्ट पर जुर्माना |
|---|---|---|---|---|
| ₹50 लाख से कम | 0% | लागू नहीं | लागू नहीं | लागू नहीं |
| ₹50 लाख या अधिक | 1% | खरीदार | Form 26QB | ब्याज + जुर्माना |
| NRI विक्रेता (विशेष मामले) | अलग-अलग | खरीदार | PAN आधारित चालान | अधिक जांच |
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का फैसला साफ है – संपत्ति खरीद पर TDS की जिम्मेदारी खरीदार की ही रहेगी। अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था के लिए अदालत ने कोई निर्देश नहीं दिया है।
इसलिए अगर आप अपना ड्रीम होम खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो टैक्स नियमों को नजरअंदाज न करें। थोड़ी सी जानकारी और सावधानी आपको लाखों रुपये के जुर्माने से बचा सकती है।
कानून स्पष्ट है, अब जिम्मेदारी भी आपकी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या ₹50 लाख से कम की संपत्ति पर TDS लगता है?
नहीं, सिर्फ ₹50 लाख या उससे अधिक पर 1% TDS लागू होता है।
TDS न काटने पर कितना जुर्माना लग सकता है?
प्रति माह 1–1.5% ब्याज और जुर्माना राशि के बराबर तक हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका कब खारिज की?
फरवरी 2026 में, अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की मांग वाली PIL को खारिज किया गया।
क्या रजिस्ट्रेशन ऑफिस TDS की जांच करता है?
फिलहाल नहीं, यही मुद्दा याचिका में उठाया गया था।
खरीदार को अब क्या करना चाहिए?
नियमों का पालन करें और जरूरत पड़े तो विशेषज्ञ से सलाह लें।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। इसे कानूनी या कर सलाह न माना जाए। नवीनतम जानकारी के लिए आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या योग्य सीए से परामर्श लें। किसी भी वित्तीय नुकसान के लिए लेखक जिम्मेदार नहीं होगा।

